तमिलनाडु की एक प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही प्लानिंग और तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो सोलर एनर्जी सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि कारोबार के लिए भी गेमचेंजर बन सकती है। तिरुनेलवेली स्थित अभिरामी पेट इंडस्ट्रीज ने महज 20 दिनों में अपने फैक्ट्री परिसर की छत पर सोलर प्लांट लगाकर हर साल करीब ₹8 मिलियन की सीधी बचत शुरू कर दी है। बढ़ती बिजली दरों और भारी मासिक बिलों से परेशान उद्योगों के लिए यह मॉडल अब मिसाल बनता जा रहा है।

कैसे सोलर प्लांट ने बदली कंपनी की बिजली कहानी
अभिरामी पेट इंडस्ट्रीज एक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स निर्माता कंपनी है, जिसकी बिजली खपत काफी अधिक थी। कंपनी का मासिक बिजली खर्च करीब ₹3.67 मिलियन और सालाना खर्च ₹44 मिलियन से ज्यादा पहुंच चुका था। ऐसे में लागत कम करना और लंबे समय तक टिकाऊ समाधान ढूंढना कंपनी के लिए जरूरी हो गया था। चेन्नई स्थित इनफोर्स सोलर ने कंपनी को रूफटॉप सोलर सिस्टम में निवेश का सुझाव दिया, क्योंकि फैक्ट्री की छत पर पर्याप्त खाली जगह उपलब्ध थी।
करीब ₹25 मिलियन की लागत से 750 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाया गया। इसमें Navitas Solar के 585 Wp Mono PERC मॉड्यूल और Solis के 150 kW इन्वर्टर का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह रही कि पूरा प्रोजेक्ट सिर्फ 20 दिनों में इंस्टॉल और कमिशन कर दिया गया, जिससे उत्पादन पर किसी तरह का लंबा असर नहीं पड़ा।
75% बिजली जरूरत पूरी, 3.5 साल में वसूली
यह सोलर सिस्टम रोजाना करीब 3,800 यूनिट और महीने में लगभग 1,14,000 यूनिट बिजली पैदा करता है। इससे कंपनी की कुल बिजली जरूरत का लगभग 75% हिस्सा सोलर से पूरा होने लगा है। इसका सीधा असर बिजली बिल पर पड़ा और सालाना ₹8 मिलियन की बचत संभव हो पाई। अनुमान है कि यह प्रोजेक्ट करीब 3.5 साल में अपनी पूरी लागत वसूल कर लेगा, जबकि सोलर पैनल 25 से 30 साल तक बिजली देते रहेंगे।
हालांकि कंपनी ने फिलहाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS नहीं लगाया है। इसकी वजह बैटरी की ज्यादा लागत और पहले से डीजल जेनरेटर पर निर्भरता रही। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज जोड़ा जाए, तो डीजल जेनसेट की तुलना में ₹10 से ₹15 प्रति यूनिट तक की अतिरिक्त बचत हो सकती है।
बढ़ती बिजली दरों के बीच उद्योगों के लिए सुनहरा मौका
Mercom India Research के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2025 के बीच भारत में 2.1 गीगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता जोड़ी गई, जिसमें करीब 20% हिस्सा औद्योगिक इकाइयों का था। तमिलनाडु जैसे औद्योगिक राज्यों में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल टैरिफ में हाल ही में 3% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिससे सोलर की आर्थिक व्यवहारिकता और मजबूत हुई है।
स्थानीय इंस्टॉलर्स का कहना है कि उद्योग रूफटॉप सोलर से ₹4 से ₹5 प्रति यूनिट की दर पर 25–30 साल तक बिजली हासिल कर सकते हैं, जबकि ग्रिड बिजली हर साल महंगी होती जा रही है। ऐसे में अभिरामी पेट इंडस्ट्रीज की यह कहानी उन सभी फैक्ट्रियों और कारोबारियों के लिए प्रेरणा है, जो बढ़ते खर्च से जूझ रहे हैं और लंबे समय का समाधान चाहते हैं। सोलर एनर्जी अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि स्मार्ट बिजनेस स्ट्रैटेजी बनती जा रही है।
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