Rajasthan Government का मेगा सोलर प्लान: 33 MW रूफटॉप प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी, जानिए शर्तें और लागत

by Dk Saini | 30/12/2025

राजस्थान सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड (RRECL) ने राज्य के सरकारी भवनों पर 33 मेगावाट के ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए बड़ा टेंडर जारी किया है। यह प्रोजेक्ट न सिर्फ बिजली की बचत करेगा, बल्कि सरकारी भवनों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इस टेंडर के तहत 25 वर्षों का ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल किया गया है, जिससे लंबे समय तक प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

RRECL Issues 33 MW Rooftop Solar Tender

किन जिलों में लगेगा सोलर प्लांट और क्या है प्रोजेक्ट की समयसीमा

RRECL द्वारा जारी इस टेंडर के तहत बारां, बूंदी, जोधपुर, पाली और सिरोही जिलों में स्थित राज्य सरकार के भवनों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएंगे। बोली लगाने वाली कंपनियों को न्यूनतम 5 मेगावाट और अधिकतम 33 मेगावाट क्षमता के लिए कोट करना होगा। इस टेंडर के लिए बिड जमा करने की अंतिम तारीख 27 जनवरी 2026 तय की गई है, जबकि 28 जनवरी को बिड खोली जाएंगी। 

चयनित कंपनियों को परियोजना का निर्माण कार्य पूरा कर 12 महीने के भीतर सोलर प्रोजेक्ट को कमीशन करना अनिवार्य होगा। यदि समयसीमा में देरी होती है, तो प्रति सप्ताह निर्माण प्रदर्शन बैंक गारंटी का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा, जो अधिकतम 20 सप्ताह तक लागू रहेगा।

लागत, बैंक गारंटी और वित्तीय शर्तें क्या कहती हैं

इस टेंडर की बेंचमार्क लागत ₹41.64 मिलियन प्रति मेगावाट तय की गई है, जो इसे एक बड़ा निवेश वाला प्रोजेक्ट बनाती है। इसके अलावा ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस की लागत ₹5 लाख प्रति मेगावाट प्रति वर्ष रखी गई है, जिसमें हर साल 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। पूरे 25 वर्षों में यह O&M लागत लगभग ₹18.23 मिलियन प्रति मेगावाट तक पहुंच जाएगी। 

बिडर्स को ₹8,32,780 प्रति मेगावाट की अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट जमा करनी होगी। साथ ही ₹5,000 का डॉक्यूमेंट शुल्क और ₹2,500 की ई-प्रोक्योरमेंट फीस भी देनी होगी। चयनित कंपनियों को ऑर्डर वैल्यू का 3 प्रतिशत तक परफॉर्मेंस बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी, जबकि कुछ विशेष श्रेणियों के लिए यह प्रतिशत अलग तय किया गया है।

तकनीकी शर्तें, अनुभव और राजस्थान का सोलर विजन

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाले सोलर मॉड्यूल्स की न्यूनतम क्षमता 540 वॉट होनी चाहिए और केवल ALMM यानी अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉड्यूल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स के तहत आने वाले मॉड्यूल्स ही मान्य होंगे। परियोजना में डिजाइन, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, कमीशनिंग के साथ-साथ इन्वर्टर, केबल, मीटर, अर्थिंग, लाइटनिंग प्रोटेक्शन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी सभी सुविधाएं शामिल होंगी। 

बिडर्स के पास पिछले 7 वर्षों में कम से कम 5 किलोवाट का एक सोलर प्रोजेक्ट और कुल कोट की गई क्षमता का 10 प्रतिशत प्रोजेक्ट कमीशन करने का अनुभव होना जरूरी है। इसके साथ ही वित्तीय रूप से भी कंपनियों को मजबूत होना अनिवार्य किया गया है। हाल के दिनों में राजस्थान सरकार द्वारा 10 मेगावाट के अन्य रूफटॉप सोलर टेंडर जारी किए जाना यह दिखाता है कि राज्य तेजी से ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है। यह मेगा सोलर प्लान आने वाले वर्षों में राजस्थान को देश के सोलर मैप पर और मजबूत स्थिति दिला सकता है।

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